20/01/2009

बिहार में बहाल शिक्षकों का सच

बिहार में शिक्षा की स्थिति सुधरी है ,इसमे कोई दो राय नही । नीतिश कुमार के नेत्रित्व में सवा तीन साल पहले बनी सरकार ने शिक्षा ,शासन और सरक में काफी सुधर लाई है । राज्य में प्राइमरी स्तर पर शिक्षकों की बहाली का काम काफी जोर -शोर से चल रहा है ,और ये शिक्षा छेत्र में विकास के लिए जरुरी भी है , पर जो शिक्षक बहाल हो रहे हैं , वो न तो किसी प्रतियोगिता के तहत हैं और ना ही किसी साक्षात्कार के आधार पर । यहाँ शिक्षक मेधा सूची के आधार पर बहाल हो रहे हैं ,मेधा सूची में पहले स्थान पर वो शिक्षक हैं जो आज से तक़रीबन दस (१०)या (२०)साल पहले किसी संस्थान से टीचर्स ट्रेनिंग कर रखे हैं , फिर शैक्षणिक योग्यता के प्राप्तांक के आधार पर चयन किया जाता है । अभी तक सवा लाख शिक्षकों की बहाली इस आधार पर हो चुकी है और ढाई लाख की बहाली की प्रक्रिया जारी है । यहाँ दो बातें स्पष्ट होना बहुत जरूरी है , जो ट्रेंड टीचर हैं उनमे से अधिकतर या तो बेरोजगार थे या फिर किसी दुसरे व्यवसाय से अपना जीवकोपार्जन कर रहे थे , उनका पढ़ने -पढाने से दूर दूर तक कोई नाता नही था । दूसरी बात आज से दस (१०)-बीस(२०) पहले बिहार में ऐसे बहुत ट्रेनिंग कॉलेज थे जिनसे डिग्रियां पैसे देकर हाथों -हाथ खरीदा जाता था ये सर्वविदित है । अब अगर मेधा सूची में ऐसे शिक्षक बहाल हैं तो राज्य के बच्चों का तो भगवन ही मालिक । नीतिश सरकार को यदि बच्चों की भविष्य की तनिक भी चिंता है तो उन्हें सबसे पहले इन शिक्षकों को सुसिक्षित करना होगा ,वरना बेरोजगारी दूर करने का यह तरीका भविष्य में कितनो को बेरोजगार बनाएगी ये कहना मुस्किल होगा ।
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