30/07/2009

जब झूट पर ऐतराज़ नहीं तो सच्चाई की कीमत पड़ ऐतराज़ क्यों

दुनिया का सबसे बड़ा सच तो यह है की "सदियों से झूठ बिकता रहा है और बिकता रहेगा । भारत में पहली बार सार्वजनिक तौर पर सच का कीमत लगाया एक टी.वी प्रोग्राम "सच का सामना "ने , उसूल - अगर आपमें है अपने ख़ुद के जीवन की पूरी सच्चाई कबूलने की हिम्मत तो " सच का सामना आपके हर सच की पाई-पाई चूका देगा साथ ही अगर आप एक भी झूट बोले तो समझिये की "बैल का बैल और नौ हाथ का रस्सी भी गया " , यानि पैसा तो मिलेगा नहीं ऊपर से कुछ खास रिश्ते नाते में भी खटाश आ सकती है खैर अपने थोड़े ही दिन के सफ़र में यह प्रोग्राम काफी मशहूर हो गया है इतना मशहूर की हमारे संसद तक पहुँच गया फिर वंहा से कोर्ट और फिर कोर्ट से हरी झंडी आखिर सच्चाई पर भला कौन रोक लगा पाया है. लेकिन इसके तय सफ़र को देख कर इतना जरुर कहा जा सकता है की बांकी के सफ़र में भी विवादों से दो -चार होना पड़ेगा टी.आर.पी तो सुरुआत से हीं मासाअल्ला अच्छी रही है तो क्यों न इस प्रोग्राम की सच्चाई पर कुछ बात किया जाय सबसे पहला सच " सच का सामना" हमारे भारतीये निर्देसक की माथे की उपज नहीं है ये भी अन्य बहुत सारे फिल्म , प्रोग्राम और गाने की धुनों की तरह बाहरी मुल्को का कॉपी है खैर कॉपी की तो हमे आदत हो गयी है इसलिए कॉपी पर no comment दूसरा सच " सच का सामना" सेक्स से जुड़े सवालों को अत्यधिक तवज्जो देता है क्यों जवाब साफ है हर इन्शान के निजी जिन्दगी में सेक्स सर्वाधिक निजी होता है और इसे सरे आम उछालने या कबूल करने की हिम्मत हर सख्स में नहीं होता पर यंहा हो रहा है क्योंकि उसकी सही कीमत मिलता है अभी तक कितने को मिला मुझे नहीं याद है यदि आपको हो तो मुझे मेल जरुर कीजियेगा सच्चाई भी यही है की सेक्स से जुड़े अतिगोपनीय सवाल की वजह से ये बहुत कम दिनों में इतना मशहूर हो गया वैसे हमारे बॉलीवुड में भी तो इन दिनों सेक्स हीं बिकता है पर यहाँ जुबानी कबूला जाता है कुछ दिखाया नहीं जाता फिर इतना एतराज़ क्यों तीसरा सच कुछ नेताओ को बहुत तकलीफ हो रहा है , उन्हें इस प्रोग्राम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को खतरा पहुंचेगा ऐसा लग रहा है श्याद ये सच भी हो पर कही ऐसा तो नहीं की वो अपने राजनितिक जीवन में इस प्रोग्राम से खतरा महसूस कर रहे हैं , की कही कोई अपने या फिर राजनितिक मित्र न इस प्रोग्राम में चला जाय और सारा सच कर रख दे , हो सकता है एक नेता का सामना कईयों के वोट -बैंक को तहस -नहस कर सकता है खैर आगे देखते हैं क्या साब होता है लेकिन कटु सत्य तो यही है की " सच के सामना में जो लोग जाते हैं वो खुद के फायदा के लिए जाते हैं रही बात हमरे देस की संस्कृति की तो मुझे नहीं लगता की इन चीजों से हमारा संस्कृति बर्बाद हो सकता है
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