15/02/2009

सब गन्दा है पर धंधा है ये ........

माँ कौन होती है ये सवाल काफी अटपटा लग रहा है , यदि ये सवाल है तो इसका जवाब है माँ वो है जो हमे जन्म देती है । पर आज हमारी बदलती सोच और बढती जरूरतों ने वैज्ञानिक खोज को वंहा पहुंचा दिया है जहाँ हम यह सोचने पर मजबूर है कि आख़िर सही मायने में उस बच्चे का माँ किसे कहा जाय जो "किराये की कोख " से जन्म लेता है और पैदा होते ही खरीदने वाली माँ के गोद में चला जाता है । दरअसल किराये की कोख(सेरोगेट मदर) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत निःसंतान दम्पति डॉक्टरों के सलाह पर किसी अन्य महिला की कोख खरीदते है , और फिर डॉक्टरों द्वारा दम्पति के अंडाणु और सुक्राणु को निषेचित कर महिला के कोख में स्थापित किया जाता है , बच्चा जन्म लेने के कुछ ही देर बाद दम्पति के हवाले कर दिया जाता है ,और कोख बेचने वाली महिला को उसकी कीमत अदा की जाती है । यही पुरी प्रक्रिया है । निःसंकोच किराये की कोख ने निःसंतान दम्पति के जीवन में एक नई आशा की किरण जगाई है पर इससे जुरे कई ऐसे सवाल है जिसपर गहन चिंतन की आवश्यकता है .निःसंतान दम्पति पहले अनाथालय से बच्चे गोद लिया करते थे सेरोगेसी के आजाने से इसमे कमी आई है । .करियर के प्रति समर्पित महानगर की महिलाये बच्चे पैदा करने में अपना वक्त नही बर्बाद करना चाहती वो सेरोगेसी अपनाना बेहतर समझती है । रही बात बच्चे की तो उसे जन्म देने वाली माँ का दूध नसीब नही होता ऐसे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास कैसा होगा कहना मुस्किल है ,खैर इससे जुरे और कई सवाल है पर जहाँ तक भारतीय सेरोगेसी का सवाल है इसमे अधिकांशतः गरीब तबके की महिलाये हीं शामिल हो रही है ,मामला साफ है वो अपने और अपने परिवार की गरीबी दूर करने के लिए मातृत्व की भावना को ताक पर रख इसे एक व्यवसाय के रूप में अपना रही है । हमारे देश में सेरोगेसी का बाज़ार काफी तेजी से बढ़ रहा है ,विदेशी भी काफी संख्या में आ रहे हैं क्योंकि यंहा उन्हें अपने देश के मुकाबले काफी कम दामो में संतान सुख प्राप्त हो जाता है । इसमे कोई दो राय नही की "कोख का बाज़ार "धीरे -धीरे अपना पांव भारत में पसार रही है । हमारी सरकार को इस मामले पर गहन चिंतन करने की जरुरत है । ..... ......... .....
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